1. Hindi News
  2. विदेश
  3. यूरोप
  4. भारत दौरे पर पहुंचे लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलॉइस, जहां न खुद की करेंसी है न ही कोई एयरपोर्ट, क्या है इस देश की खासियत

भारत दौरे पर पहुंचे लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलॉइस, जहां न खुद की करेंसी है न ही कोई एयरपोर्ट, क्या है इस देश की खासियत

 Written By: Amar Deep
 Published : Oct 26, 2026 03:59 pm IST,  Updated : Oct 26, 2026 03:59 pm IST

लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलॉइस चार दिन के दौरे पर भारत आए हैं। लिकटेंस्टीन की बात करें तो यहां न कोई एयरपोर्ट है और न ही कोई करेंसी। यहां की आबादी मात्र 40 हजार के आस-पास है।

लिकटेंस्टीन।- India TV Hindi
लिकटेंस्टीन। Image Source : INDIA TV

लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलॉइस चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। यहां पर पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार और निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (इनोवेशन) के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है। मंत्रालय ने बताया कि प्रिंस एलॉइस, जो फिलहाल इस छोटे यूरोपीय देश के कार्यवाहक प्रमुख हैं, के साथ उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफी और कई प्रमुख उद्योगपतियों का एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी आएगा। हालांकि प्रिंस एलॉइस के इस दौरे ने लिकटेंस्टीन की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

यह यूरोप का एक बहुत छोटा सा देश है, जो आल्प्स पर्वतों के बीच बसा है और जिसकी आबादी केवल 40,000 है। लेकिन इतनी कम आबादी के बावजूद, लिकटेंस्टीन दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है और पर्यटकों के बीच काफी मशहूर है। वर्ल्ड एटलस के अनुसार, 2026 में लिकटेंस्टीन की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) (PPP) 195,372 अमेरिकी डॉलर थी। इस वजह से, लिकटेंस्टीन - जहां न तो कोई एयरपोर्ट है और न ही अपनी कोई मुद्रा है। साल 2026 में यह दुनिया का सबसे अमीर देश बन गया।

क्यों अनोखा है लिकटेंस्टीन?

लिकटेंस्टीन स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों से घिरा हुआ है। इसकी राजधानी वाडुज़ है। लिकटेंस्टीन की अपनी कोई मुद्रा (करेंसी) या केंद्रीय बैंक नहीं है; इसके बजाय, यह स्विस फ्रैंक (CHF) का उपयोग करता है, जिसे स्विस नेशनल बैंक जारी करता है। यह स्विट्जरलैंड के साथ एक कस्टम और मौद्रिक संघ (monetary union) के माध्यम से संभव हुआ है। 

भले ही यह काफी हद तक स्विट्जरलैंड पर निर्भर है, लेकिन लिकटेंस्टीन के पास पूरी संप्रभुता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बताया है कि यह छोटा यूरोपीय देश 1719 से एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मौजूद है। इसमें कहा गया है, "ऑस्ट्रिया के लिकटेंस्टीन परिवार ने क्रमशः 1699 और 1713 में वाडुज़ और शेलनबर्ग के क्षेत्रों का अधिग्रहण किया। 1719 में, 'होली रोमन एम्पायर' (पवित्र रोमन साम्राज्य) के अंतर्गत, ये क्षेत्र 'लिकटेंस्टीन' नाम से एक स्वतंत्र रियासत बन गए।"

इसमें आगे बताया गया है, "नेपोलियन के नेतृत्व में फ्रांसीसियों ने कुछ वर्षों तक इस देश पर कब्ज़ा कर लिया था, लेकिन 1815 में नए 'जर्मन परिसंघ' (German Confederation) के भीतर लिकटेंस्टीन को फिर से स्वतंत्रता मिल गई। 1868 में, जब यह परिसंघ भंग हो गया, तो लिकटेंस्टीन ने अपनी 80 सैनिकों वाली सेना को खत्म कर दिया और हमेशा के लिए तटस्थ (neutral) रहने की घोषणा की। दोनों विश्व युद्धों के दौरान भी इस तटस्थता का सम्मान किया गया।"

ना कोई एयरपोर्ट न कोई बंदरगाह

लिकटेंस्टीन में कोई बंदरगाह या एयरपोर्ट नहीं है। यात्री आमतौर पर पड़ोसी देश स्विट्जरलैंड या ऑस्ट्रिया के एयरपोर्ट पर उतरते हैं। हालांकि, बाल्ज़र्स में एक हेलीपोर्ट ज़रूर है। लोग ट्रेन, बस या कार के ज़रिए भी लिकटेंस्टीन पहुंच सकते हैं।

लिकटेंस्टीन पर किसका शासन है?

लिकटेंस्टीन में वंशानुगत संवैधानिक राजतंत्र है। यहां का राजकुमार (प्रिंस) राज्य का प्रमुख होता है; वह विदेशों में देश का प्रतिनिधित्व करता है और अंतरराष्ट्रीय संधियों पर हस्ताक्षर करता है। जहां तक सरकार की बात है, तो यह एक सामूहिक निकाय है जिसमें सरकार का प्रमुख और चार सरकारी पार्षद शामिल होते हैं। इन पार्षदों को संसद की मंज़ूरी के बाद राजकुमार द्वारा नियुक्त किया जाता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, "कानून बनाने की प्रक्रिया में राजकुमार की भूमिका में सरकारी बिल पेश करने की पहल करना और संसदीय प्रस्तावों पर वीटो (अस्वीकार करने) का अधिकार शामिल है। राजकुमार के पास शाही आदेश जारी करने की शक्ति है। देश की सुरक्षा और कल्याण खतरे में होने पर 'आपातकालीन शाही आदेश' भी जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए सरकार के प्रमुख के प्रति-हस्ताक्षर (countersignature) की आवश्यकता होती है।"

प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा

प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा रविवार से शुरू हुई। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार और निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाना है। अपनी यात्रा के दौरान, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "इस यात्रा से भारत और लिकटेंस्टीन के बीच बढ़ते संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद है, खासकर 2025 में 'भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते' (TEPA) के लागू होने के बाद से।" मंत्रालय ने आगे कहा, "यह यात्रा भारत और लिकटेंस्टीन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहरा करने तथा आपसी हित के नए क्षेत्रों में साझेदारी बनाने का अवसर प्रदान करेगी।"

यह भी पढ़ें-

फ्रांस की सड़कों पर गुस्सा, शहर-शहर प्रोटेस्ट, आगजनी और हिंसा, राष्ट्रपति मैक्रों की अपील बेअसर, अब तक नहीं बनी बात

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Europe से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश।